13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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जोधपुर गोलीकाण्ड से भी सबक लें तो पुनरावृत्ति रोकी जा सकती हैं

रविवार रात पदमराज डिपार्टमेंटल स्टोर के मालिक वासुदेव इसरानी की गोली मार कर आखिर कर आरोपियों ने हत्या कर ही ली, जैसी आशंका जताई जा रही थी। उन्हें धमकियां मिल रही थी, पहले इस दुकान पर रिहर्सल कर गये आरोपी। पुलिस ने आज दिन तक किसी को नही पकड़ा। बेगुनाह व्यापारी की बेरहम हत्या से आम जन क्रूद्व एवं गुस्से मे है। राजस्थान हाईकोर्ट मे ऐसी घटनाओं की लगातार हो रही पुनरावृत्ति पर संज्ञान लेकर आला अफसरों को तलब किया हैं। 
लेकिन पुलिस, अदालत और हमारे सामने सोचनीय स्थिति यह हैं कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोका कैसे जा सके? आखिर इनके पीछे दोषी कौन हैं? यह गेंग गिरोह पनप कैसे रहे हैं? पुलिस की लापरवाही, मिली भगती एवं गलती को नकारा नही जा सकता। 
आज पुलिस थानों मे अपराधी और गेंगस्टर तथा उनको सरंक्षण देने वाले आका और बड़े दलाल खुले मे बैठे देखे जा सकते हैं आम आदमी और फरियादी के साथ पुलिस किस तरह का बर्ताव करती हैं यह किसी से छुपा हुआ नही है। पुलिस हमेशा ऐसे आरोपों को नकारती हैं लेकिन वहां कैमरे लगा दे ंतो असलीयत सामने आये बिना नही रह सकती। पुलिस को आमजन के प्रति विश्वास बनाये रखना होगा, डंडा और आंख दिखाने की प्रवृत्ति से आमजन खौफ महसूस करता हैं पुलिस के नजदीक ही जाना नही चाहता। 
अपराधी शहर गांव मे घूमते हैं आम आदमी भी वहीं रहते घूमते हैं वे अगर खुद को पुलिस के नजदीक समझ अपनी सुरक्षा के प्रति विश्वास मे रहे तो 2 मिनट मे अपराध और अपराधी की सूचना पुलिस को दे सकता है। लेकिन पुलिस मे बैठे लोग ऐसे सूचना देने वालों के नाम उजागर कर उसकी जान जोखिम मे डाल देते हैं। 
क्या वासूदेव इसरानी की हत्या और इससे पहले फायरिंग करने आये लोग सरदारपुरा रोड़ पर पहले नही घूमे, क्या किसी दुकान के बाहर कैमरे नही हैं वहां से गुजरने वालों की उस वक्त की फुटेज देख कर मालूम किया जा सकता हैं कि कौन अपराध की नीयत से घूम रहा है या घूम कर गया हैं। 
पुलिस थानों की बदहाली भी ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। पुलिस थानों मे राजनीतिक आकाओं के वृहदहस्त पोस्टिंग पाते हैं ये आका अपराधियों को पनाह सरंक्षण देते हैं निर्दोषों को अंदर टिकवा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। पुलिस थानों मे उस इलाके के लोगों को रखना ही नही चाहिए। छोटे से सिपाही को भी 2 साल से ज्यादा एक थाने मे नही रखना चाहिए और बाद मे कम से कम जिला नही वृत तो बदल ही देना चाहिए। पुलिस थानों मे सीसी टीवी कैमरे होने चाहिए ताकि पता चल सके कि वहां थानाधिकारियों की हाजरी मे कौन कौन से अपराधी, गेंगस्टर और दलाल पहुंचते हैं। महफिलें सजती हैं उनकी आवभगत होती है। पुलिस की कार्यशैली और दिनचर्या उस थाने मे कैसी रहती है। बीट कांस्टेबल और इंचार्ज को चाहिए कि वह निरंतर अपने बीट मे रहें और वहां के रहवासियों, किरायेदारों से मेलजोल बढायें और निगरानी रखें कि कौनसा नया चेहरा उनके बीच आया हैं कौनसा बदमास उनके इलाकों मे घूमता है। 
दूसरी बात हैं जेलों की दर्दनाक कहानियां। जोधपुर सेन्ट्रल जेल मे कईं बार मोबाइल और ड्रग्स पकड़े गये। किसी बड़े जेल आॅफिसर या दोषी नीचे वालों को गिरफ्तार कर नौकरी से बाहर नही किया गया। आज भी सेन्ट्रल जेल हो, जिला जेल हो या उप कारागृह, वहां लगे जेल अधिकारी कर्मचारी मौज मार रहे हैं कैदियों के पास मोबाइल, ड्रग्स जैसी तमाम सुविधाएं होती हैं अंदर बैठे गेंग चलाते हैं, मर्डर करवाते हैं अपराध करवाते हैं मारपीट करवाते हैं, मकान दुकान भूखण्ड खाली करवाते हैं। पुलिस जब चाहे किसी जेल उप जेल या जिला जेल पर छापा मार कर कार्यवाही कर देखें। जहां भी ऐसा मिले, उस जेल के पूरे स्टाॅफ को सस्पेंड, नौकरी से बाहर या गिरफ्तार कर देना चाहिए ताकि कैदियों को मिलने वाली ऐसी सुविधाएं नही मिल सके। ज्यादातार अपराध जेल मे बैठे बंदी ही करवाते हैं जो बाहर जमानत पर चल रहे अपराधियों के सम्पर्क मे होते हैं या फिर पहले के परीचित अपराधी। जेलों मे भी सीसी टीवी कैमरे लगा देने चाहिए। इन अपराधियों की कथित रूप से बड़ी गेंग हैं जो छोटी छोटी अदालतों तक अपनी पहुंच बना चुकी हैं। यहां जमानत करवाने के ठेके चलते हैं। सरकार को बढते अपराधों पर गहन मनन, मंथन और विचार करना चाहिए कि आदतन अपराधियों की जो गेंग चला कर करोड़ों की काली कमाई कर आम जन के लिए खतरा बने हुए हैं उसे कैसे रोका जाये, वरना वासूदेव इसरानी जैसे बेगुनाह लोग आने वाले दिनों मे बलि चढेंगे और चढते रहेंगे, पुलिस और बड़े अफसर कुछ दिन सख्त रह कर फिर रूटीन के दिनों मे आ जायेंगे। जोधपुर हाईकौर्ट द्वारा तलब किए गये गृह सचिव एवं पुलिस अफसरों को ऐसा प्लान कोर्ट मे भी पेश करना चाहिए कि वह भविष्य के इंतजामों को कैसे कारगर बनायेंगे।