13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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मानवेन्द्र के पुराने दिन लौटेंगे , राजपूतों से सुलह को बेकरार भाजपा

बाड़मेर। पिछले लोकसभा चुनावों मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंतसिंह का टिकट काटने वाली भाजपा को अब जसवंत परिवार एवं उनके समर्थकों की कमी अखरने लगी हैं। एक दिन पहले दौरे पर बाड़मेर आये बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने मानवेन्द्र समर्थकों से पार्टी बैठक मे शरीक होने एवं पुनः आने का न्यौता दिया लेकिन वे मानवेन्द्र को ससम्मान तरजीह देने पर ही एग्री होने का कह कर वहां से चल दिये। ज्ञात रहे कि गत दिनों जैसलमेर दौरे पर आई मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने भी बाड़मेर जैसलमेर के राजपूत नेताओं के साथ बैठक कर उनसे समर्थन मांगा और कहा कि भूल जाओ पुराने गिले शिकवे, मैं आपके जोर पर ही तो राजनीति करती हूं। मुख्यमंत्री के इस संकेत से साफ हो गया था कि मारवाड़ के राजपूत नेताओं को बीजेपी मे वापस लौटाने की कवायद शुरू हो चुकी हैं। बता दें कि बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षैत्र सहित संभाग के कईं इलाकों मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंतसिंह का खास प्रभाव हैं तथ उनकी टिकट काटने से उनके प्रति जबरदस्त सहानुभूति भी दिखाई थी। जसवंत विद्रोही उम्मीदवार के रूप मे भी डटे रहे, यह अलग बात हैं कि परिणाम उनके अनुकूल नही रहा। 
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इतने दिन तक बीजेपी ने मानवेन्द्र समर्थकों मे कुछ को उनसे अलग करने की कोशिश भी की। लेकिन कामयाबी नही मिल सकी।मानवेन्द्र अभी भी सार्वजनिक तौर पर न तो बीजेपी के कार्यक्रम और न बैठकें अटेण्ड कर रहे है। बीजेपी के वीआईपीज की मीटिंगों से भी कन्नी काटते रहे हैं। अब चूंकि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं भाजपा मे नाखूश लोगों से सुलह कर उन्हें पार्टी मे लाने के प्रयास तेज कर दिये है।
सूत्रों ने बताया कि मानवेन्द्रसिंह स्वंय एवं उनके समर्थक भी चाह रहे हैं कि उनकी बड़े पद के साथ वापसी हो, हालांकि मानवेन्द्र को पार्टी से बाहर नही किया गया हैं। इसके लिए केन्द्रीय नेतृत्व पर भरोसा जतायेंगे। केन्द्रीय नेतृत्व मानवेन्द्र की बड़े पद पर वापसी की मध्यस्थता करेगा, तब ही मानवेन्द्र एवं उनके समर्थक बीजेपी के करीब आयेंगे। इसके लिए पार्टी स्तर पर भी मंथन चल रहा है। भाजपा मे जसवंतसिंह जसोल की शीर्ष तक पहुंच रही हैं तथा उनके इशारों से काम होता था। लेकिन लोकसभा चुनाव बाद भाजपा ने मानवेन्द्रसिंह की उपेक्षा शुरू कर दी और तरजीह देना भी बंद कर दिया था। अब भाजपा उन्हें फिर से पुराने दिन लौटाने की इच्छा जतानी शुरू कर दी है।