23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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पालिकाओं के हफ्ते की किश्तें जयपुर तक पहुंचती हैं!

नगरपालिकाओं मे हफ्ता बंदी से चल रहे सूदखोरी का मामला
जोधपुर। मारवाड़ के कम पढे लिखे सफाई कार्मिकों एवं लिपिकों के साथ सूदखोरी का धंधा 2010 से चल रहा है। करीबन 7 साल तक चल रहे इस गौरख धंधे को लेकर नगरपालिकाओं के स्थानीय अफसर जो हफ्ता वसूलते हैं अंदर की खबर हैं कि इसी हफ्ते की वसूली का हिस्सा जयपुर डीएलबी के डायरेक्टर तक पहुंचता है। अकेली बाड़मेर नगरपरिषद मे 1 करोड़ के 18 महिने मे 1 करोड़ 80 लाख बनाये जाने का निजी फाइनेन्सर का यह गौरख धंधा 2010 से चल रहा हैं सबसे पहले यहां नियुक्त हुए कथित राजस्व अधिकारी एवं आयुक्त कालूखां ने इसकी शुरूआत की थी। 
मुख्यमंत्री के सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायत का जवाब तक नही
सूत्रों ने बताया कि बाड़मेर के ही पुरूषोतम बाल्मिीकि ने निजी फाइनेन्सर द्वारा मनचाही ब्याज दरों पर अपने ही संवर्ग के गरीब कार्मिकों को लूटे जाने का मामला राजस्थान की मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गये सम्पर्क पोर्टल पर कईं बार डाल कर शिकायत की लेकिन आज दिन तक बाड़मेर के प्रशासन ने इसकी कोई सुनवाई नही की। पुरूषोतम ने आरटीआई मे कईं अर्जियां दायर कर रखी हैं। 
समानान्तर बैंकिंग व्यवस्थाः अफसरों पर प्रश्न चिन्ह
दरअसल, 1 लाख के 18 महिनों मे 1 लाख 80 हजार वसूली कार्मिकों की तनख्वाह से सीधे अपने खाते मे करने वाली जोधपुर की बाफना फाइनेन्स कम्पनी के पनप रहे गौरख धंधे ने मारवाड़ की नगरपालिकाओं एवं परिषदों के ही नही जोधपुर नगर निगम के अफसरों तक की ईमानदारी और मिली भगती पर सवाल खड़े कर दिये हैं। यहां सन 2010 से यह अवैध कारोबार चल रहा हैं जो सरकारी बैंकिंग व्यवस्थाओं के समानान्तर हैं। 
बाड़मेर नगरपरिषद मे तनख्वाहों के बिलों पर आयुक्त ही नही यहां का सभापति भी दस्तखत कर रहा हैं जिन्हें एक एक कटौती का पता हैं ऐसे मे वह कहां से मुकर सकता हैं कि उसके कार्यकाल मे यह धंधा नही चल रहा है। पिछले महिनों लगातार 3 महिनें बाफना फाइनेन्स की किश्तें कटौती बंद कर आयुक्त एवं सभापति ने सौदेबाजी की और बाद मे इसी बाफना फाइनेन्स के कर्ज के पैसों की कटौती कार्मिकों के वेतन से सीधे ही कर ली। आपको बतादें कि नगरपरिषद के वेतन बिल मे कटौती के काॅलम मे बाफना फाइनेन्स छपा रखा है। इससे अंदाज लगाया जा सकता हैं कि यह अवैध कारोबार डीएलबी के जोधपुर से लगा कर जयपुर तक के अफसरों की मौन स्वीकृति एवं मिली भगती से चल रहा है। राज्य सरकार को ऐसे गरीब कार्मिकों को आर्थिक शोषण एवं सूदखोरी से बचाने के लिए कोई बड़ी कवायद करनी चाहिए और निष्पक्ष जांच बिठा कर दोषी अफसरों के विरूद्व दण्डात्मक कार्यवाही करनी चाहिए, वरना यह गौरख धंधा कईं गरीबों की जान ले लेगा? जैसे प्राइवेट फाईनेन्सरों की दबंगई से मारवाड़ मे कईं गरीबों की जाने जा चुकी है।