13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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पुलिस की तहकीकात मे निकली सामूहिक दुष्कर्म की कहानी झूठी

बच्ची इंफेक्शन की पहले थी शिकार, दवाईयां इस्तेमाल करती थी
बाड़मेर। एक केन्द्रीय विधालय की दूसरी कक्षा की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा कर एफआईआर दर्ज कराने वाले उसी के पिता की पूरी कहानी पुलिस जांच एवं मेडिकल रिपोर्ट मे झूठी निकली। 3 दिन तक पुलिस एवं प्रशासन के लिए गले की फांस बने रहे इस मामले मे बच्ची के कारण केन्द्रीय विधालय को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कहा हैं कि बच्ची के साथ कोई दुष्कर्म नही हुआ हैं। बच्ची के पिता द्वारा एफआईआर मे गढी कहानी और पुलिस मे दिये बयानों की गहन छानबीन की गई तो पूरी कहानी झूठ निकली।
न कैमरों से हुई ताईद, न मेडिकल से
बच्ची के पिता ने 13 सितंबर को जिस समय स्कूल मे यह घटना बताई हैं उस वक्त उस कक्षा मे बच्ची थी ही नही, कैमरों की जांच से यह भी पता लगा कि जिस स्वीपर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया हैं उस स्वीपर की बच्ची के साथ यह यह बच्ची खेलती देखी गई। मेडिकल रिपोर्ट मे बच्ची के आंतरिक एवं बाहरी स्तर पर कहीं भी चोट या जबरदस्ती होने के साक्ष्य नही मिले हैं। कल तक उसके परिजन ही नही कईं राजनेता और युवा संगठन भी मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी बता कर पुलिस को कोस रहे थे।
पारीवारिक समस्याओं और कलह का शिकार हैं परिवार
पुलिस और सीडब्लयूसी की जांच मे यह सामने आया हैं कि बच्ची का पिता भी पारीवारिक रूप से परेशान हैं तथा फ्रस्टेड रहता हैं। वह अपना तबादला बाड़मेर से चाहता था। घर कलह के शिकार इस परिवार ने बच्ची को मोहरा बना कर यह झूठी कहानी गढी हैं, इस बात पर पुलिस अब तहकीकात कर रही है। 
निजी अस्पताल की डाॅक्टर की गलत राय से मामले को मिला तूल
उक्त बच्ची के दर्द होने की शिकायत पर उसके पिता उसे निजी अस्पताल ले गये। जहां एक आयुर्वेदिक चिकित्सक ने प्राइवेट पार्ट को देखते ही दुष्कर्म जैसी घटना होने की राय देकर पड़ौस के एक निजी चिकित्सालय मे भेज दिया। जहां भी नौसिखिये डाॅक्टर ने ऐसी ही राय दे दी। बस, इस गलत राय से मामला तूल पकड़ता गया और सरकारी चिकित्सकों की रिपोर्ट पर संदेह जताया जाने लगा। 
बच्ची के पहले से हैं इंफेक्सन
बताया गया हैं कि उक्त बच्ची के पहले से ही इंफेक्सन रहता हैं तथा वह नियमित रूप से उस पर लगाने की मेडिसन इस्तेमाल करती हैं। संभवतः इससे इंफेेक्सन बढ गया और वह पार्ट कलर बदल गया। 
उतावली मीडिया और संगठनों को लेनी चाहिए नसीहत
उक्त घटना को लेकर बाड़मेर पुलिस एवं स्वंय उक्त केन्द्रीय विघालय को फालतू ही फजीहत का सामना करना पड़ा। दिन रात एक करने मे जुटी रही पुलिस को वक्त देने से पहले ही कांग्रेस के नेताओं एवं दूसरे संगठनों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए सरकार तक को घेरने मे कोई कसर और अवसर नही छोड़ा। यहां के कतिपय मीडिया कर्मियों ने तो स्पेशल कवरेज दिखा कर पूरे मामले को हवा देने का अभियान तक चलाया। ऐसे संगठनों एवं मीडिया को इस तरह की घटना से सबक लेना चाहिए कि किसी मासूम बच्ची एवं बेगुनाह संस्थान की फजीहत मे उनकी भूमिका क्यों रहनी चाहिए?