23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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आखिर प्रियंका क्यों कटी रहती हैं बीजेपी के असली कार्यकर्ताओं से?

हर बार चुनावी हार का कारण कहीं ये तो नही
बाड़मेर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने भले ही जाट समुदाय के दिवंगत दिग्गज नेता गंगाराम चैधरी से राजनीतिक रिश्ते निभा कर प्रियंका चैधरी को यूआईटी के चेयरमेन का पद दे दिया हो लेकिन खुद प्रियंका इन राजनीतिक रिश्तों को निभाने मे कामयाब होगी? क्या प्रियंका कभी कोई चुनाव जीत कर भाजपा का आंकड़ा बढाने मे सफल होगी? ऐसे ही सवालों के जवाब बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र के मतदाता ही नही बल्कि स्वंय बीजेपी कार्यकर्ता मांग रहे हैं जिन्होनें शुरू से ही बीजेपी से लगाव रखा।
ज्ञात रहे कि वयोवृद्व जाट नेता गंगाराम चैधरी ने अपने राजनीतिक उतराधिकारी के रूप मे पौती प्रियंका को आगे किया। खुद चैधरी का दिया दिलाया टिकट जसवंतसिंह जसोल के दखल के कारण आखिरी बार बीजेपी ने काट दिया। नतीजन गंगाराम चैधरी ने विद्रोह का बिगुल बजाया और बीजेपी की उस समय की अधिकृत उम्मीदवार रही मृदूरेखा चैधरी को हराने मे सफलता अर्जित कर ली। इससे पहले गंगाराम चैधरी ने वृद्व अवस्था देखते हुए पंचायत चुनाव भी प्रियंका को लड़वाया लेकिन चैधरी के जीते जी प्रियंका चुनाव मे हार गई। इसके बाद भाजपा ने बाड़मेर सीट से 2013 के विधानसभा चुनाव मे प्रियंका को उतारा लेकिन प्रियंका के सामने मृदुरेखा ने बदला लेने की नीयत से विद्रोह खड़ा कर दिया। बागी उम्मीदवार के रूप मे चुनाव लड़ी और प्रियंका को जीत से बाहर कर दिया।
प्रियंका की हार मे बावजूद राज मे आई श्रीमती वसुंधरा राजे ने जाट समुदाय को तरजीह देने की नीयत से प्रियंका को यूआईटी चेयरमेन बना दिया। लेकिन आज स्वंय बीजेपी के कार्यकर्ता यह कहने को विवश हैं कि प्रियंका उनकी नही सुनती, यहां तक कि वह मुश्कील किसी का फोन उठा लें? बीजेपी के असली कार्यकर्ताओं से सम्पर्क तो दूर की बात है। हालांकि श्रीमती वसुंधरा राजे ने गंगाराम चैधरी के रिश्तों को देखते हुए ही प्रियंका को यूआईटी चेयरमेन बनाया था। 
चूंकि, बीजेपी सता मे हैं बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र का सबसे बड़ा भाग बाड़मेर शहर हैं जहां कांग्रेस का नगरपरिषद बोर्ड हैं वहां खुले आम भ्रष्टाचार एवं अनियमितताएं हो रही हैं पब्लिक चिल्ला रही हैं जन सुविधाओं के लिए। बीजेपी के तमाम पार्षद भी काम के लिए लाचार हैं उनकी सुनवाई नही हो रही हैं ऐसे बीजेपी के कार्यकर्ताओं की कहीं कोई सुनवाई नही हो रही है। खुद प्रियंका ने इस भ्रष्ट बोर्ड को लेकर आज दिन तक कार्यकर्ताओं का साथ नही दिया। बीजेपी के असली कार्यकर्ता यह बताते हैं कि मैडम से मिलना तो दूर फोन पर वार्ता भी कभी नही होती। तरजीह नही मिलने से ये कार्यकर्ता भंयकर गुस्से मे हैं। भले ही प्रियंका पर खास लोगों से घिरे रहने के आरोप लगते रहे लेकिन आखिर राजनीति की असली जड़ कार्यकर्ता हैं उनकी उपेक्षा उनके राजनीतिक जीवन मे कितनी भारी पड़ सकती हैं यह आने वाला समय अवश्य बतायेगा? प्रियंका की यह आदत बताती हैं कि दो चुनावों मे हार की उनकी वजह यही रही होगी, बाकी तो उनका राजनीतिक भविष्य ही बतायेगा?