23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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नगरपरिषद के तत्कालीन आयुक्त की कारस्तानी, लाखों का किया गोलमाल

हाईकोर्ट मे मामला लम्बित, आयुक्त ने बदला होटल का भूउपयोग परिवर्तन
बाड़मेर। नगरपरिषद के तत्कालीन आयुक्त श्रवण विश्नोई द्वारा कथित होटल के भूउपयोग परिवर्तन को लेकर की गई बड़ी डील का उसके तबादले के बाद राजफाश हुआ हैं। हालांकि पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट मे लम्बित हैं जिसकी सुनवाई 18 सितंबर होनी हैं। हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को नगरपरिषद आयुक्त को जवाब देने के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
क्या गुल खिलाये आयुक्त ने
नगरपरिषद बाड़मेर ने सदर थाना के पीछे खसरा नंबर 1665/5/1 मे कुल 185 बीघा जमीन टाउनशीप योजना के लिए आरक्षित की थी। जिसमें 5 बीघा जमीन जमीन होटल के लिए आरक्षित की गई। नगरपरिषद ने उक्त होटल के लिये 2007 मे जमीन नीलामी से बेची। दिल्ली के मिराज इंटरनेशनल ग्रूप ने करीबन 50 लाख 50 हजार रूपये मे यह जमीन खरीदी। 
इस बीच बाड़मेर निवासी आसकरणसिंह ने उक्त होटल की जमीन मे से 2 बीघा 18 बिस्वा भूमि अपने होने का दावा जताया। राजस्व मंत्री हेमाराम चैधरी के निर्देशों पर बाड़मेर कलक्टर ने एक टीम गठित कर जमीन की पैमाईश करवाई। पैमाईश मे यह साबित हुआ कि होटल के लिए नीलाम की जमीन मे 2 बीघा 18 बिस्वा जमीन आसकरणसिंह राजपूत की हैं। 
इधर आसकरणसिंह ने अपनी उक्त जमीन या इसके बदले मुआवजा दिलाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट मे याचिका दायर की थी। जिस पर नगरपरिषद ने अपने जवाब मे माना कि आसकरणसिंह को जमीन के बदले करीबन 4 करोड़ रूपये का भुगतान देने के लिए तैयार हैं। इस बात की सहमति बाद हाईकोर्ट ने आसकरणसिंह की याचिका का निस्तारण किया। लेकिन बाद मे नगरपरिषद अपनी ही अण्डरटेकिंग एवं सहमति से मुकर गई तो आसकरणसिंह की ओर से नगरपरिषद के विरूद्व अवमानना याचिका दायर की गई। इधर शातिर नगरपरिषद ने फिर पूर्व के हाईकोर्ट आदेश को रिव्यू करने की याचिका भी दायर कर दी। यह रिव्यू याचिका संख्या 55/2014 आज भी हाईकोर्ट मे लम्बित हैं जिसकी सुनवाई 18 सितंबर को होनी है इसमें आयुक्त को व्यक्तिगत तलब कर रखा हैं।
इधर इस मामले मे तत्कालीन आयुक्त श्रवण विश्नोई ने बड़ी डील कर होटल की जमीन खरीदने वाली कंपनी के नाम सुनियोजित ढंग से भू-उपयोग परिवर्तन करवा दिया। होटल मालिक ने संास्थानिक प्रयोजन जमीन काम लेने का आवेदन दायर किया था। करीब 18 लाख शुल्क वसूल कर श्रवण कुमार ने डीएलबी से एडजस्टमेंट कर एवं उन्हें गुमराह कर यह भूउपयोग परिवर्तन करवा लिया। जबकि विश्नोई को पता था कि मामला हाईकोर्ट मे विचाराधीन हैं।
रियायती दर पर दी थी होटल की जमीन
सूत्रों ने बताया कि नई होटल नीति के तहत टाउनशीप योजना मे उक्त होटल की जमीन मिराज ग्रूप को तत्समय की प्रचलित आरक्षित आवासीय दर की 50 फीसदी कटौती दर पर नगरपरिषद ने दी थी। करीबन 50 लाख 50 हजार की उस समय की यह जमीन बाजार भाव से करीबन 2 करोड़ की थी। खुद नगरपरिषद ने आसकरणसिंह को उक्त जमीन मे से सिर्फ 2 बीघा 18 बिस्वा जमीन का मुआवजा 4 करोड़ देने की सहमति 2012 मे राजस्थान हाईकोर्ट मे दे रखी हैं। हालांकि आज उक्त 5 बीघा जमीन के बाजार भाव 6 से 7 करोड़ रूपये हैं। इस तरह तत्कालीन आयुक्त ने हाईकोर्ट मे मामला लम्बित रहते हुए भी रियायती दर पर कोडियों के मोल दी गई जमीन का भू उपयोग परिवर्जन अफसरों को गुमराह कर कर दिया।
डीएलबी को किया गुमराह
सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन आयुक्त श्रवण विश्नोई ने मिराज ग्रूप से बड़ी डील करने के बाद डीएलबी निदेशक को यह नही बताया कि उक्त होटल जमीन तत्समय की प्रचलित आवासीय दर की 50 फीसदी दर पर परिषद द्वारा बेची गई हैं। सिर्फ होटल उपयोग से संास्थानिक प्रयोजनार्थ परिवर्तन की अनुमति मांगी। इधर आयुक्त श्रवण विश्नोई ने राजस्थान हाईकोर्ट मे चल रहे आसकरणसिंह प्रकरण एवं कंटेंम्प्ट याचिका के बारे मे भी डीएलबी को नही बताया। इस तरह कोड़ियों के मोल बेची गई बेशकीमती जमीन का भू उपयोग परिवर्तन अनर्गल तरीके से कर आयुक्त ने लाखों की काली कमाई की हैं, ऐसे आरोप लग रहे हैं।