13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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डीएलबी दबाने मे लगी हैं आईएएस के चचेरे भाई की नौकरी का मामला

बाड़मेर। आईएएस अफसर जोगाराम के चचेरे भाई को बाड़मेर नगरपरिषद मे चोर रास्ते से कनिष्ठ लिपिक पद पर नौकरी दिये जाने का मामला उजागर हुए लम्बा समय गुजरने के बावजूद भी स्वायत शासन विभाग कोई जांच नही करवा रहा हैं खबर हैं कि पूरा विभाग अपने पूर्व निदेशक जोगाराम के दबाव के मध्यनजर लीपापोती करने मे लगा हुआ हैं। 
प्राप्त खबर के अनुसार आईएएस एवं पूर्व स्वायत शासन निदेशक जोगाराम को उपकृत करने के लिए नगरपरिषद बाड़मेर के अधिकारी ने पहले उनके चचेरे भाई पीराराम को अस्थाई नौकरी दी और फिर सुनियोजित षड़यंत्र के तहत श्रम विभाग के समझौता अधिकारी के समक्ष पीराराम से स्थाई कराने का परिवाद दाखिल करवाया। परिवाद मे नोटिस जारी होने पर नगरपरिषद के उच्चाधिकारियों ने षड़यंत्र रच कर एक असक्षम एवं अनाधिकृत अधिकारी के जरिए उसे स्थाई करने की सहमति श्रम विभाग के समझौता अधिकारी के समक्ष जाहिर करवा दी। इस तरह पीराराम को मिली भगती से करवाये गये समझौते के तहत नगरपरिषद मे स्थाई कनिष्ठ लिपिक बना दिया। हालांकि बाद मे हाईकोर्ट पहुंचे इस मामले मे सुनवाई बाद पीराराम की नियुक्ति को रद्द करने का निर्णय भी पारित हो गया। हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर मे जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास एवं जी.आर.मूलचन्दानी की खण्डपीठ ने 21 सितंबर 16 को ही यह निर्णय दे दिया कि पीराराम अनुबंध पर अस्थाई नियुक्त किया गया था, इसलिए वह अपनी सेवा को स्थाई करने का दावा करने का अधिकार नही रखता है।
चूंकि, नगरपरिषद ने 21 सितंबर 16 को हाईकोर्ट का निर्णय पारित किए जाने के बावजूद इस आदेश को दबाये रखा और कोई कार्यवाही नही की। जबकि नगरपरिषद इस प्रकरण मे पक्षकार थी। इधर आईएएस जोगाराम के भाई पीराराम ने हाईकोर्ट मे रिव्यू पीटिशन दाखिल की हैं लेकिन इसमे हाईकौर्ट ने किसी तरह का स्थगन आदेश नही दिया हैं। बावजूद इसके नगरपरिषद मे उसे नौकरी से बेदखल नही किया गया। 
सूत्रों ने बताया कि ज्यों ही पूरे मामले मे लोकायुक्त सचिवालय मे परिवाद दर्ज होने के की भनक अफसरों को लगी तो हरकत मे आये नगरपरिषद प्रशासन ने हाथ खड़े करने शुरू किये। इस बीच आईएएस जोगाराम ने अपने साथी आईएएस और वर्तमान डीएलबी निदेशक पवन अरोड़ा से मदद ली। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा ने जोगाराम के चचेरे भाई के विरूद्व लोकायुक्त सचिवालय मे मामले के लम्बित रहने के दौरान पीराराम का तबादला बाड़मेर से सांचोर नगरपालिका मे कर दिया। इनकी मंशा रही हैं कि बाड़मेर से तबादले के बाद मामले को ठण्डा कर दिया जायेगा। हकीकत यह हैं कि डीएलबी के वर्तमान निदेशक पवन अरोड़ा को पूरे मामले की तह तक जाना चाहिए था और पता लगाना चाहिए था कि आखिर पीराराम को किस ढंग से नौकरी देकर उसे मिली भगती से अवैध रूप से स्थाई कर दिया गया? पूरे मामले मे लोकायुक्त ने क्षैत्रीय उप निदेशक से रिपोर्ट तलब की हैं।