13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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क्या वाकई कांग्रेस के कुछ जाट नेता बाड़मेर मे मेवाराम का विकल्प तलाश रहे हैं?

बाड़मेर। हालांकि विधानसभा चुनाव होने मे ठीक 12 महिने बचे हैं लेकिन सियासी हलचल शुरू हो गई हैं। प्रमुख दलों मे नेताओं के बीच एक दूसरे को आंख दिखाने, दल बदलने के संकेत देने और नये दावेदारों के नाम आगे करने जैसी गतिविधियां भी शुरू हो गई है। बाड़मेर जिले की कुल 7 विधानसभा सींटो मे सबसे बहुचर्चित सींट बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र की बनती जा रही हैं। यहां से कांग्रेस के मेवाराम जैन दूसरी बार विधायक हैं। जैन को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ग्रूप मे नजदीकी माना जाता हैं। अंदर की खबर हैं कि कांग्रेस के कुछ जाट नेता बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र से जैन का विकल्प तलाशने की तैयारियों मे जुट गये हैं। इन नेताओं ने राजपुत समुदाय के एक युवा व्यवसायी को आगे कर एक्शन रिएक्शन देखना भी शुरू कर दिया हैं। इस युवा व्यवसायी को ये जाट नेता बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र मे आयोजित होने वाले विभिन्न समारोहों, अवसरों एवं कार्यक्रमों मे न केवल शरीक होकर चर्चाओं मे आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं बल्कि स्वंय ये नेता इनके साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों मे देखे जा सकते हैं। सबसे बड़ी खासियत यह हैं कि कांग्रेस के इन जाट नेताओं के साथ जहां भी युवा व्यवसायी रहता हैं वहां बाड़मेर के कांग्रेस विधायक मेवाराम जैन नजर नही आते। इस तरह बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र मे जाट नेताओं द्वारा राजपुत समुदाय के युवा व्यवसायी को यकायक प्रोजेक्ट करने की खबरें सामने आने के दौरान ही एक क्षैत्रीय न्यूज पोर्टल को दिये साक्षात्कार मे कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हरीश चैधरी ने ऐसे ही एक सवाल पर गोलमाल जवाब देकर इन चर्चाओं को बल देने की कोशिश की हैं। चैधरी से जब यह पूछा गया कि बाड़मेर विधानसभा क्षैत्र से युवा व्यवसायी आजादसिंह को टिकट दिलाने की तैयारी मे हैं और इसी सवाल की निरंतरता मे वर्तमान विधायक मेवाराम जैन की दावेदारी को लेकर पूछा गया तो वे खामोश रहे और टिकट का फैंसला सोनिया गांधी पर छोड़ दिया। हरीश चैधरी ने यह दावे के साथ नही कहा कि बाड़मेर से मौजूदा विधायक मेवाराम जैन ही सशक्त दावेदार हैं और वे ही हकदार हैं? हरीश चैधरी ने यहां तक कहा कि वे टिकट फाइनल करने के दौरान अपनी राय रखेंगे लेकिन यह नही कहा कि किसके पक्ष मे रखेंगे? ज्ञात रहे कि पूर्व राजस्व मंत्री हेमाराम चैधरी और पूर्व सांसद हरीश चैधरी दोनों ही इस युवा व्यवसायी के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम अटेण्ड कर रहे हैं। राजनीति के इस नये खिलाड़ी ने संभवतः इन्ही नेताओं के अंदरूनी आशीर्वाद से सोशल मीडिया पर प्रचार मे तेजी से हिस्सेदारी बढाई हैं, इससे इंकार नही किया जा सकता। यह अलग बात हैं कि इस युवा व्यवसायी का अब तक राजनीति से कोई सरोकार नही रहा हैं जबकि मौजूदा विधायक पिछली मोदी लहर मे भी अपनी जीत को रिपिट करवाने का रिकाॅर्ड बना सके हैं। उनकी राजनीतिक पृष्टभूमि के मुकाबले भले ही यह युवा व्यवसायी कोई अहमियत नही रखते हो मगर कांग्रेस के कुछ जाट नेताओं ने इसे बाड़मेर विधानसभा सींट के लिए कांग्रेस के दावेदार के रूप मे प्रोजेक्ट कर एक्शन रिएक्शन लेने शुरू कर दिये हैं। इस बात की भनक स्वंय मौजूदा विधायक मेवाराम जैन को भी हैं। इस तरह कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं राहुल गांधी के नजदीक माने जाने वाले नेता हरीश चैधरी द्वारा मेवाराम जैन की बिंदास पैरवी नही की जाना, उक्त युवा व्यवसायी को बतौर युवा नेता प्रोजेक्ट करना और सोशल मीडिया पर एक्टिव रखने जैसी बातें यह संकेत देने लग गई हैं कि ये जाट नेता बाड़मेर सींट से मेवाराम जैन का विकल्प जरूर तलाश रहे हैं इसके पीछे आखिर क्या कारण हैं, यह तो वे ही जाने लेकिन जैन की दावेदारी को संकट मे डालने की तैयारियां तो सुनियोजित ढंग से शुरू हो ही गई हैं, इसमें कोई शक नही हैं। जबकि राजनीति के बड़े जानकार मेवाराम के मुकाबले इस युवा व्यवसायी को बेहद कमजोर मानते हैं।
और भी कईं संकेत
कांग्रेस के सचिव हरीश चैधरी द्वारा पिछले कुछ दिनों से दिये जा रहे वक्तव्यों से यह लगता हैं कि आने वाले चुनाव से पहले दल बदलने के खेल भी होंगे। यह अलग बात हैं कि उन्होने बाड़मेर नगरपरिषद बोर्ड के कार्यकाल को संतोषजनक नही माना लेकिन वे इसका दोष प्रतिपक्ष के खास विशेष नेताओं पर देने के बजाय सरकार पर देकर चुप्प रह गये। जबकि क्षैत्रीय स्तर पर सरकार का किसी तरह का कोई रोल नही रहता। 
खुद पर भरोसा हैं मेवाराम को
बाड़मेर सींट पर कांग्रेस की उम्मीदवारी को लेकर चल रही उठापठक के बीच खुद विधायक मेवाराम जैन को अपने पर पूरा भरोसा हैं वे पूर्व सीएम अशोक गहलोत के नजदीकों मे शामिल हैं। वे पूरी सक्रियता से चुनावी तैयारियों मे भी जुटे हुए हैं। पिछली बार उन्हें जीत दोहराने के लिए खासी टक्क्र देखनी पड़ी। निर्दलीय मृदुरेखा चैधरी के सहारे वे 5 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज करवा पाये थे। जबकि उन्होने पहला चुनाव मृदुरेखा चैधरी को 23 हजार से अधिक मतों के अंतर से हरा कर विधायक बने थे। पार्टी मे ही उनके विरोधी इस मुद्दे पर उनकी दावेदारी कमजोर करने की फिराक मे हैं।