13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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अब पुलिस के ग्रेज्यूएट सिपाही बनेंगे अनुसंधान अधिकारी!

जयपुर। पुलिस मे जांच के लिए लम्बित मुकदमों की बकायात त्वरित निपटाने के लिए अब ग्रेज्यूएट एवं पांच साल के अनुभवी कांस्टेबलों को अनुसंधान अधिकारी बनाया जायेगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने प्रस्ताव बना कर राज्य सरकार को भेज दिये हैं। अब तक दिल्ली मे ऐसा किया जाता था। थानों मे तैनात कांस्टेबल भी दर्ज होने वाले सामान्य मुकदमों मे आरोपितों को गिरफ्तार करने का अधिकार रखेंगे। राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए एक गाइडलाइन भी तैयार की हैं। मुकदमों की तफतीश ऐसे सिपाहियों को दी जाएगी जो ग्रेज्यूएट हो और पांच साल का अनुभव रखते हो।  
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव को मौखिक रूप से मंजूरी दे दी है। हालांकि अभी तक पुलिस मुख्यालय को सरकार से कोई स्वीकृति पत्र नहीं मिला है। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय क्राइम ब्रांच और गृह विभाग के अधिकारियों की बैठक भी हुई है। ज्ञात रहे कि पुलिस महकमे में मुकदमों का अनुसंधान करने के लिए अनुसंधान अधिकारियों की कमी है, इसके लिए यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया हैं। 
एकअनुसंधान अधिकारी द्वारा साल में करीब 32 मुकदमों जांच करने का नियम है। लेकिन एसआई, एसआई इंस्पेक्टर स्तर के पुलिसकर्मियों की कमी के कारण एक ही अनुसंधान अधिकारी को साल में 100 से 200 मामलों की जांच करनी पड़ रही है। इस कारण तफ्तीश में लापरवाही भी हो जाती है। 
सूत्रों के मुताबिक पुलिसमुख्यालय के अधिकारियों का मानना है कि थानों में ज्यादा मुकदमे चोरी, मारपीट, झगड़ा, सड़क दुर्घटना संबंधित दर्ज होते हैं। कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मियों द्वारा अनुसंधान करने पर इनकी जांच समय पर हो सकेगी। प्रदेश में इस साल जनवरी से अगस्त माह तक 1.16 लाख से ज्यादा आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनमें से 45 हजार मुकदमों में एफआर लग चुकी है। जबकि 18,500 से ज्यादा प्रकरण अभी पेंडिंग चल रहे हैं। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का दावा है कि कांस्टेबल अगर अनुसंधान करेंगे तो पेंडेंसी बिल्कुल कम रह जाएगी। 
नई व्यवस्था अगर लागू हो जाती हैं तो कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मियों को जांच के लिए सामान्य मारपीट, लूट, चाेरी, नकबजनी, सड़क दुर्घटना अन्य छोटे-मोटे प्रकरण दिए जाएंगे। इससे पहले ऐसे मामलों की जांच हैड कांस्टेबल स्तर के पुलिस कर्मी करते थे।