23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाली पुलिस आखिर रफीक को करेगी गिरफ्तार?


बालोतरा। भ्रष्टाचार मे आकण्ठ डूबे नगरपरिषद बालोतरा के तथाकथित सफाई निरीक्षक रफीक पठान और उसके अफसर के खिलाफ आर.टी.आई. मे सूचनाएं मांग कर उनको जेल भिजवाने का सपना देखने वाले एक आरटीआई कार्यकर्ता को ही जबरन जेल भेजने का झूठा मामला दर्ज करवाने का षड़यंत्र रचने वाले रफीक पठान की पोल आखिर खुल ही गई।
बालोतरा के डीएसपी को दिये बयानों मे परिवादिया ने साफ कहा हैं कि विकास कोठारी को पहचानती ही नही। परिवादिया महिला ने कहा कि 15 सितंबर को न सुबह ना शाम को विकास कोठारी नामक व्यक्ति ने मुझे बाईक से टक्कर मारी और न रास्ता रोक छेड़छाड़ का प्रयास किया। परिवादिया की उम्र 48 साल हैं वह नगरपरिषद बालोतरा मे सफाई कर्मचारी हैं जिसका फर्जी ढंग से इंसपेक्टर बना हुआ हैं रफीक पठान।
परिवादिया ने पुलिस के डीएसपी को दिये बयान मे यह भी बताया कि रफीक पठान ने मैरे से नौकरी के कागजों पर दस्तखत करने को कहा था, ना कि एफआईआर पर। मैं पढी लिखी नही हूं, मैने दस्तखत कर दिये। 
इसी तरह परिवादिया ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये बयानांे मे बताया कि रफीक पठान ने उससे झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई है। वह किसी विकास कोठारी को नही जानती।
इस तरह एक अनुसूचित जाति की विवाहित महिला से किसी आरटीआई कार्यकर्ता के विरूद्व झूठा मुकदमा नगरपरिषद के एक तथाकथित इंसपेक्टर जो फर्जी ढंग से निरीक्षक की कुर्सी संभाल बैठा हुआ हैं आखिर बड़े अफसरों के सहारे झूठा छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करवा कर उसे जेल भंेजने का षड़यंत्र रचा। इस षडयंत्र मे रफीक को पनाह देने वाले अफसर और कईं आका है, देखना यह हैं कि क्या पुलिस अपना कर्तव्य निभायेगी? पुलिस ने आखिर किसकी सिफारिश पर यह मामला दर्ज किया? पुलिस खुद धारा 182 सीआरपीसी के तहत रफीक एवं षड़यंत्रकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के लिए स्वतंत्र हैं तो फिर चुप्प क्यों? कईं अहम सवाल हैं, बालोतरा नगरपरिषद मे हुए घोटालों के? आखिर कौन हैं इनके पीछे, जो करोड़ों का गेम खेल रहे हैं इस धनाढ्य नगरी मे।