23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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दबंग आयुक्त के लिए चुनौती, क्या निजी काॅलोनाइजर्स से निकलवायेंगे गरीबों की जमीन!

बाड़मेर। गरीबों के ठेलों और आशियानों पर बुलडोजर या कानून का डंडा चलाने वाले नगरपरिषद के दबंग कहे जाने वाले आरएएस आयुक्त के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह हैं कि क्या गरीबों के लिए आरक्षित 10 फीसदी भूखण्ड हड़प कर बैठे निजी काॅलोनाईजर्स से वे कानून का डंडा दिखा कर जमीन निकलवाने का साहस जुटा पायेंगे?
कौनसे हैं गरीबों के भूखण्ड
अर्फोडेबल हाउसिंग पाॅलिसी 2010 के तहत निजी काॅलोनाईजर्स को योजना क्षैत्र मे कटने वाले भूखण्डों मे 10 फीसदी भूखण्ड ईआईजीएच यानि गरीब वर्ग के लोगों को रियायती दरों पर देने के लिए आरक्षित रखते हुए नगरपरिषद के नाम करवा देने चाहिए थे। नगरपरिषद के अफसरों की ड्युटी थी कि वे ऐसे काॅलोनाईजर्स द्वारा 10 फीसदी आरक्षित भूखण्ड नगरपरिषद के नाम करने के बाद ही काॅलोनाईजर्स को पट्टे देते। लेकिन यहां के अफसरों ने आंखे मूंद कर काॅलोनाइजर्स से सौदेबाजी कर इन 10 फीसदी भूखण्डों का कोई ख्याल नही रखा और न नगरपरिषद के नामे करवाये। ज्ञात रहे कि 10 फीसदी भूखण्ड का मतलब एक काॅलोनाईजर्स ने 70 लाख से 1 करोड़ कीमत की गरीबों को दी जाने वाली जमीनें हड़प् ली हैं। इस हेराफेरी मे तत्कालीन परिषद अफसरों की लिप्तता साथ रही हैं।
4 हैं बड़े काॅलोनाईजर्स
नगरपरिषद इलाके मे ऐसे चार बड़े काॅलोनाईजर्स हैं जिसमें सभापति लूणकरण बोथरा एवं उसके भाई की दुर्गा विहार रेजीडेंसी एवं दुर्गा विहार काॅलोनी शामिल हैं। इन काॅलोनियों मे एक एक भूखण्ड की कीमत लाखों मे हैं।
फाइलें हैं काॅलोनाईजर्स के पास
आश्चर्य तो इस बात का हैं कि काॅलोनाईजर्स ने सबूत मिटाने की नीयत से नियमन की फाइलें तक परिषद से हटवा कर अपने कब्जे मे ले रखी हैं। यही कारण हैं कि आरटीआई मे मांगने के बावजूद सभापति लूणकरण बोथरा किसी को सूचनाएं नही दे रहा है। आरोप हैं कि फाइलें उनके कब्जे मे है।
ऐसे भी लगाया चूना 
सूत्रों ने बताया कि सभापति ने स्वंय अपने भाई की काॅलोनी केे नियमन के लिए भरे जाने वाले भीतरी विकास शुल्क मे भी भारी हेराफेरी करवाई हैं। कायदे से योजना की पूरी भूमि के नाप पर ही आंतरिक विकास शुल्क वसूला जाना था। लेकिन नगरपरिषद के अफसरों ने आंखे मूंद कर सिर्फ 60 प्रतिशत भूमि का ही आंतरिक विकास शुल्क वसूला। इससे भी नगरपरिषद को लाखों का नुकसान पहुंचा हैं। इसी तरह 3 अन्य बड़े काॅलोनाईजर्स से भी 60 फीसदी जमीन पर भीतरी विकास शुल्क वसूला गया है। यानि कि 40 फीसदी जमीन पर भीतरी विकास की राशि कुछ डील कर छोड़ दी जाकर परिषद को नुकसान पहुंचाया गया है। 
क्या आरएएस आयुक्त करेगा यह काॅलोनी सील
काफी अर्से बाद नगरपरिषद को मिले दबंग आरएएस आयुक्त ऐसे काॅलोनाइजर्स द्वारा हड़पे गये गरीबों के भूखण्डों को नगरपरिषद के स्वामित्व मे लेने के लिए सीलिंग की कार्यवाही करेंगे, यह सवाल अहम हैं। बाड़मेर शहर मे ऐसे चार बड़े काॅलोनाइजर्स हैं जो लूणकरण बोथरा एवं उसके भाई की तरह गरीबों के आरक्षित भूखण्ड हड़प कर बैठे हुए हैं।