13 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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न्यायमूर्ति पटेल का इस्तीफाःकहीं न्यायपालिका मे सता का दखल तो नही हैं कारण

कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जयंत पटेल का यकायक इस्तीफा यह संकेत दे रहा हैं कि न्यायपालिका मे सताधारी दल का हस्तक्षेप और दखल खलल डालने का काम कर रहा है। वरिष्ठ न्यायाधीश जयंत पटेल सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश थे, जिनके बचे 10 महिने के कार्यकाल मे वे वहां के मुख्य न्यायाधीश बन कर सुप्रीम कोर्ट के जज बनने वाले थे और यह उनका अपना हक था।
सुप्रीम कोर्ट ने अचानक जयंत पटेल को इलाहबाद स्थानांतरित करने का फरमान जारी कर दिया ताकि वे मुख्य न्यायाधीश नही बन सके। न्यायमूर्ति जयंत पटेल ने इसे अपना अपमान एवं प्रताड़ना का प्रकरण मानते हुए खामोश रह कर इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। लेकिन पटेल जैसे सशक्त और न्यायप्रिय न्यायाधीश के समर्थन मे कर्नाटक एवं गुजरात की बार आंदोलन पर उतर आई है तथा तीखी प्रक्रियाएं भी जाहिर की है। उल्लेखनिय रहे कि न्यायमूर्ति जयंत पटेल ने गुजरात उच्च न्यायालय मे अपने 2011 के कार्यकाल दौरान इशरत फर्जी मुठभेड़ काण्ड मे सीबीआई जांच के आदेश दिये थे। संभवतः इसी का बदला उनसे अब लिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने ज्यों ही न्यायमूर्ति जयंत पटेल को इलाहबाद स्थानांतरित करने का आदेश दिया, न्यायमूर्ति पटेल ने अपना इस्तीफा भेज दिया। ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट काॅलेजियम ने अभी करीबन नौ मुख्य न्यायाधीश विभिन्न उच्च न्यायालयों मे नियुक्त किए हैं वे सब जस्टिस जयंत पटेल से जूनियर है। इधर जस्टिस जयंत पटेल के पक्ष मे उतरी कर्नाटक और गुजरात बार एसोसियेशन ने काॅलेजियम के निर्णय की निंदा की है। इस तरह ज्यूडिसियरी मे अपने ही लोगों के साथ सौतेलापन और प्रताड़ना करने का मामला सामने आना निःसंदेह चिंतनीय एवं विचारणीय है। ज्यूडिसियरी पर देश के करोड़ों लोगों की आस्था एवं विश्वास हैं तथा निष्पक्ष न्याय की उम्मीदें बंधी हुई हैं टिकी हुई हैं। एक वरिष्ठ एवं न्यायप्रिय जस्टिस खुद के साथ अन्याय होता देखने से पब्लिक पर क्या गुजरती होगी? जस्टिस पटेल के साथ हुए इस सौतेलेपन से आहत वरिष्ठ वकीलों ने सीधा इशरत फर्जी मुठभेड़ काण्ड मे सीबीआई जांच के आदेश देने का मामला जोड़ा हैं यानि कि सताधारी दल का कहीं न कहीं दखल होने का अंदेशा जाहिर किया हैं। जो देश की न्याय व्यवस्था के लिए ही नही हर वर्ग के लिए चिंतनीय एवं असहनीय हैं।