11 December 2017 00:00:00 AM Breaking News
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बदहाल सांचोर अपनी ही दुर्दशा पर बहा रहा हैं आंसू!

जीर्ण—क्षीर्ण सड़कें, अतिक्रमणों की भरमार
 सांचौर। चौतरफा अतिक्रमण, जीर्ण क्षीर्ण सड़कें और गंदी से त्रस्त गली मौहल्ले यही बयां कर रहे हैं कि सांचोर अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा हैं। नगरपालिका के निकम्मेपन पर नागरिक प्रशासन भी खामोश हैं। ऐसे मे शिकार हो रहे यहां के रहवासियों को इस बात का भी मलाल हैं कि उनके यहां गैर राजनीतिक एक महिला अध्यक्ष हैं वरना एक दबंग राजनीतिक पुरूष चुना जाता तो शायद वह आमजन क पीड़ाओं को सुनता और निराकरण की पहल भी करता। 
दरअसल, पहले यहां की नगरपालिका मे लम्बे समय तक स्थाई अधिशाषी अधिकारी की नियुक्ति नही थी, अब किसी अधिकारी को चार्ज दिया गया हैं तो वह समस्याओं के प्रति कतई संवेदनशील नजर नही आता। विकास तो कोसों दूर हैं जो थोड़े बहुत काम हो रहे हैं वह भी घटिया दर्जे के और गुणवताहीन।  शहर की सडकों पर कचरे के ढेर पड़े दिख रहे हैं। गंदे पानी की निकासी को बनी नालियां गंदे मैले से दबी पड़ी हैं।   कई कॉलानियों में नालियों का पानी सडक पर रिस कर बह रहा है, जनता परेशान है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जनता आखिर कहें भी किसे, यहां के न जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे है, ना अधिकारी। ऐसे में जनता की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
-जनप्रतिनिधि भी नही दिखाते दिलचस्पी
हैरत की बात तो यह है कि जिले के चुने हुए जनप्रतिनिधि इस क्षेत्र की दिक्कतों को लेकर कोई दिलचस्पी नही दिखा रहे हैं सांचोर इलाके के ही सांसद हैं और जिला प्रमुख भी । चुनावों के वक्त लम्बे चौड़े वायदे कर जनता से समर्थन जुटाने वाले इन नेताओं का दखल होता तो शायद सांचोर की यह दुर्दशा नही होती।  
इसी तरह सांचोर में एसडीएम के पद पर मुरारीलाल शर्मा ने पदभार ग्रहण करने के बाद लोगों के विकास को लेकर कईं सपने संजोए थे, लेकिन एसडीएम भी लोगों की उम्मीदों पर खरें उतरते नही दिख रहे है। हां एसडीएम कार्य जरूर कर रहे है, लेकिन वो शहर को गंदगी से निजात दिलाने एवं विकास के नये आयाम स्थापित कर सांचोर की सूरत बदलने की दिशा मे कोई रूचि नही ले रहे है।  इसी तरह सांचोर कस्बे मे आवारा गौवंश की बढती तादाद भ्री आमजन के लिए खासी परेशानियां खड़ी कर रही है। प्रशासन के पास इससे निपटने की कोई योजना नही है।  टूटी फूटी सड़कों पर पैदल चलना भी दुर्भर हो रहा है। बहरहॉल, प्रशासनिक एवं राजनीतिक उदासीनता के चलते सांचोर अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा हैं तो जनप्रतिनिधि और अधिकारी मूकदर्शक बने हुए है। जिसका खामियाजा यहां की जनता भुगत रही है।