23 October 2017 00:00:00 AM Breaking News
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क्या हो रहा हैं विश्व की सर्वाधिक बड़ी गौशाला के इलाके मे,गौ माता की अंदरूनी व्यथा..!

सांचौर। मैं गौमाता! उस क्षेत्र की गौमाता हूं जो मेरे कारण ही पूरे भारत देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में अपनी पहचान बना पाया है। मेरे नाम से ही इस क्षेत्र में करीब दो दर्जन गोशालाएं बन गई हैं, जहां पर मेरे नाम से सरकार ही नहीं बल्कि अन्य मेरे भक्त भी लाखों करोडों रूपयों का अनुदान एवं दान दे रहे हैं। लेकिन मैं व मेरा वंशज शहर की गलियों में घूमने को मजबूर है, मै जब तक दूध देती हूं तब तक लोग मेरा उपयोग करते हैं फिर छोड़ देते हैं मुझे शहर में, जहां मैं इधर उधर कडी धूंप में भूखी प्यासी घूमती रहती हूं, कभी प्लास्टिक खाकर अपनी भूख मिटाटी हूं तो कभी इधर इधर का बदबू भरा झूठन। मेरे दिखावेबाज गोभक्तों की भी कमी नहीं हैं, कई तो ऐसे हैं राम-राम सा, नमस्ते, प्रणाम की जगह मेरा नाम लेते हैं, जय गौमाता। लेकिन उनको भी मेरी हालत पर कोई तरस नहीं आता है। वो चाहे तो मुझे भी उन शालाओं में रख सकते हैं, जहां मेरे नाम से सारी सुविधाएं हैं। लेकिन वे लोग केवल मेरे नाम से ही अपना उल्लु सीधा कर रहे हैं। मैं ही नहीं मेरा वंशज भी सड़कों पर इधर उधर डोलने को मजबूर हैं, हमारे कारण लोग परेशान रहते हैं, कई बार दुर्घटनाएं होती हैं, लोग चोटिल भी होते हैं। हमारे कारण यातायात भी बाधित होता है, लेकिन मैं तो मजबूर हूं, लेकिन आप क्यों नहीं सुन रहे हो मेरी करुण भरी पुकार। मैं व मेरा वंशज दुखी इसलिए हैं कि हमारी चिन्ता न तो जनप्रतिनिधि कर रहे हैं और ना ही प्रशासनिक अधिकारी। शहर के कई लोग हैं जो मुझे व मेरे वंशज को उन गोशालाओं में रखने के बदले आर्थिक सहयोग देने को भी तैयार हैं, फिर भी आप क्यों सहमत नहीं हो। कुछ माह पहले आई बाढ़ में हमारा हजारों गोवंश काल का ग्रास बनें, उनकी जगह आपके पास खाली हो गई होगी अब मैं उनकी जगह तो आ सकती हूं। मैं व मेरा वंशज गौशालाओं में आउंगी तो ज्यादा आर्थिक भार नहीं डालूंगी। सुना हैं अब तो मेरा गोमूत्र, गोबर भी बिकने लगा है, जिससे भी तुम्हें कुछ न कुछ आर्थिक फायदा होगा, मेरा दूध भी आपको दूंगी उससे भी आमदनी होगी, फिर भी यदि मुझे पालने में आर्थिक मदद की जरूरत होगी तो कुछ मेरे गोभक्त दे देंगे जो अब तक करोड़ों अरबों तुम्हें दे चुके हैं। हम बेजूबां हैं, हमारे नाम पर तुम्हें मिलने वाले करोड़ों अरबों का हिसाब हम नही मांग रही हैं हमारा तो दिल से निवेदन हैं कि अब तो मेरी पुकार सुनो...मैरी व्यथा सुनो — मुझे इन सडकों से मेरे नाम की गोशालाओं में ले चलो...मैं खुश रहूंगी तो आपको आशीर्वाद भी दूंगी